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थेरॉन लड़खड़ाते हुए अपने कक्ष से बाहर निकलता है, खुद को किसी तरह संभालने की कोशिश करता हुआ। उसकी साँसें काँप रही हैं। उसके हाथ थरथरा रहे हैं। उसकी पत्नी का श्राप अब भी उसके मस्तिष्क में ऐसे गूँज रहा है, मानो किसी विशाल घंटी पर पूरी ताकत से प्रहार किया गया हो।
वह बाईं ओर मुड़ता है।
ट्रेवन का कार्यालय।
वह दस्तक नहीं देता।
वह दरवाज़े को पूरी ताकत से तोड़कर खोल देता है—लकड़ी दीवार से ऐसी टकराती है जैसे वह कोई बेकार पड़ा मेहमानखाना हो।
कमरा अँधेरा है, केवल एक नीचे रखी लालटेन की मद्धिम रोशनी से प्रकाशित।
दीवारों के साथ ऊँची काली किताबों की अलमारियाँ हैं, जो चमड़े से बंधी डायरियों और पुराने स्क्रॉलों से भरी हुई हैं। हवा भारी है—अगरबत्ती, धूल और किसी बहुत प्राचीन चीज़ की गंध से।
ट्रेवन अपनी मेज़ के पीछे बैठा है। उसकी उँगलियाँ आपस में जुड़ी हुई हैं। आँखें गहरे ध्यान में बंद हैं।
वह अपनी आँखें खोलता है।
न कोई आश्चर्य।
न कोई झुंझलाहट।
सिर्फ़ ठंडी, संतुलित जागरूकता।
थेरॉन दोनों हाथ ज़ोर से मेज़ पर पटकता है।
थेरॉन:
“तुम मेरे साथ खड़े रहोगे, ट्रेवन। हमेशा रहे हो।”
ट्रेवन मुस्कुराता नहीं।
ट्रेवन:
“निस्संदेह, मेरे स्वामी।”
थेरॉन कमरे में बेचैनी से चक्कर लगाने लगता है।
थेरॉन:
“सब कुछ बिखरता जा रहा है! जब से मेट्रो आया है, हर चीज़ मेरे नियंत्रण से बाहर होती जा रही है...”
ट्रेवन उसे बिना किसी दया के देखता रहता है।
तभी थेरॉन उसकी आँखों को अस्वाभाविक चमकते हुए देखता है—तेज़ रक्तिम माणिक जैसी लाल।
वह जड़ हो जाता है।
उसने उन्हें पहले कभी ऐसा नहीं देखा था।
उसकी आँखों के पीछे दबाव बनने लगता है—सिरदर्द, सम्मोहन जैसी अनुभूति, ऐसा चक्कर कि पूरा कमरा डोलता हुआ महसूस होता है।
थेरॉन फिर से मेज़ पर मुक्का मारता है।
थेरॉन (चिल्लाते हुए):
“कुछ तो बोलो!!”
आख़िरकार ट्रेवन बोलता है। उसकी आवाज़ उस्तरे की धार जैसी तीखी है।
ट्रेवन (शांत स्वर में):
“इन सभी वर्षों तक मैंने तुम्हारी निष्ठापूर्वक सेवा की है।
मैंने अपनी पूरी शक्ति से तुम्हें सही मार्ग दिखाने की कोशिश की। हम सबको विनाश से बचाने की कोशिश की।
लेकिन मुझे डर है... अब बहुत देर हो चुकी है।
जो हो चुका है... वह हो चुका है।”
थेरॉन ज़ोर से सिर हिलाता है।
थेरॉन:
“नहीं...”
जैसे कोई बच्चा ऐसी सच्चाई स्वीकार करने से इंकार कर रहा हो जिसे वह सहन नहीं कर सकता।
ट्रेवन उसकी बात अनसुनी करके आगे बोलता है।
ट्रेवन:
“मैंने तुम्हें मेट्रो के बारे में चेतावनी दी थी।
मैंने तुम्हें उसके भाई कैट के अप्रत्याशित स्वभाव के बारे में चेताया था।
मैंने तुम्हें सलाह दी थी कि किले में सक्षम सैनिकों को इकट्ठा करो।
मैंने शुरू से ही अपनी सेवाएँ देने की पेशकश की थी, ताकि तुम्हारे अभियान का नेतृत्व कर सकूँ और उसे सुरक्षित रख सकूँ।”
वह आगे झुकता है। उसकी आँखें जल रही हैं।
ट्रेवन:
“लेकिन तुमने मेरी बात अनसुनी कर दी।
(एक पल का विराम)
बताओ, थेरॉन...”
थेरॉन की साँस अटक जाती है।
ट्रेवन ने उसे पहले कभी उसके नाम से नहीं पुकारा था।
ट्रेवन:
“यह जानकर कैसा लगता है कि तुम एक पिता के रूप में असफल रहे... सिर्फ़ सत्ता और नियंत्रण की अपनी असीम लालसा के कारण?
और इतना सब होने के बाद भी...
तुम एक बेहद निकृष्ट शासक हो।”
थेरॉन क्रोध से फट पड़ता है और लालटेन को उलट देता है।
वह ज़मीन पर गिरकर चकनाचूर हो जाती है।
काँच के टुकड़े हर दिशा में बिखर जाते हैं और दीवारों पर नाचती हुई परछाइयाँ उभर आती हैं।
अब अलमारियों पर केवल कुछ मोमबत्तियाँ ही जल रही हैं।
थेरॉन (तेज़ और आक्रामक स्वर में):
“मेरे साथ इस तरह बात करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई! तुम मुझ पर एहसानमंद हो!”
ट्रेवन धीरे-धीरे खड़ा होता है।
ट्रेवन:
“नहीं...
एहसान तो तुम्हें मेरा मानना चाहिए...
...क्योंकि मैंने अनगिनत बार तुम्हारी जान बचाई है, जब तुम्हारे फैसले हम सबकी मौत का कारण बन सकते थे।”
(एक लंबा, दम घोंट देने वाला मौन)
ट्रेवन:
“तुम्हारी शक्ति फिसल रही है।
समुदाय अब तुम्हारे अधिकार का सम्मान नहीं करता।
और पुजारी...
वे इसी समय तुम्हारी हत्या की साज़िश रच रहे हैं।”
थेरॉन का अवचेतन चीख उठता है।
उसकी दृष्टि धुँधली पड़ जाती है।
ट्रेवन की चमकती हुई आँखें मानो उसके मन को अपनी ओर खींच रही हों—उसे मोड़ रही हों, दबा रही हों, नियंत्रित कर रही हों।
ट्रेवन अपना ब्रीफ़केस बंद कर देता है।
ट्रेवन (पूर्ण शांति के साथ):
“यदि भाग्य ने साथ दिया, तो जल्द ही मुझे इस दायित्व से मुक्ति मिल जाएगी।
मैंने यहाँ अपना समय आनंद से बिताया...
...लेकिन अब मैं इस लॉज से आगे निकल चुका हूँ।”
वह हल्की मुस्कान के साथ सिर झुकाता है और थेरॉन की ओर देखे बिना उसके पास से निकल जाता है।
ट्रेवन:
“तुमसे मिलकर प्रसन्नता हुई।”
थेरॉन उसे ऐसे देखता रह जाता है जैसे किसी दूसरे संसार का प्राणी उसकी दुनिया छोड़कर जा रहा हो।
वह उसके पीछे दौड़ता है, बेबसी में हाथ बढ़ाते हुए।
थेरॉन (गिड़गिड़ाते हुए, चिल्लाकर):
“कहाँ जा रहे हो, ट्रेवन!
वापस आओ!”
लेकिन ट्रेवन एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखता।
थेरॉन काँपती साँसों के साथ एक भारी कराह निकालता है और अपने ही कार्यालय की ओर भागता है—वह आख़िरी जगह जहाँ उसे अब भी ऐसा महसूस होता है कि वह एक राजा है।
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